वार्षिक पंचांग एकादशी 2026-27

वार्षिक एकादशी गौड़ीय वैष्णव पंचांग 2026-27 – आठ महाद्वादशी ब्रतों की महिमा क्‍यों है ?

व्रतों का विधान अक्सर दो प्रकार का देखा जाता है।

एक है वैष्णव विधान तथा दूसरा स्मार्त विधान। स्मार्त अक्सर ज्योतिषशास्त्र के आधार पर ही निर्धारित है। वैष्णव विधान ज्योतिष तथा भगवान श्रीविष्णु के निर्देशानुसार होता है, जो कि पुराण, स्मृति शास्त्र एवं उपनिषदों पर आधारित होता है। वैष्णव की एकादशी तिथियों में आठ एकादशियों का व्रत द्वादशी में ही करना चाहिए ऐसा शास्त्र निर्देश है। इसके बारे में ब्रह्मवैवर्तपुराण के श्रीसूत-शौनक संवाद में लिखा है:-

उन्मीलनी व्यंजुली च त्रिपुष्पा पक्षवर्धिनी।
जया च विजया चैव जयन्ती पापनाशिनी।।
द्वादश्यष्टौ महापुण्याः सर्वपापहरा द्विज।
तिथि योगेन जायन्ते च तथा चतुष्टयापरास्तथा।
नक्षत्र योगाच्च वलात् पापं प्रश्यन्ति ताः॥

यह अष्ट महाद्वादशी, महा पुण्यस्वरूप एवं पापनाशक है। इनमें वार-नक्षत्र योग आदि होते हैं। यह सब द्वादशी, पातकराशि विनाशिनी है। उन्मीलनी, व्यंजुली, त्रिपुष्पा, पक्षवर्धिनी यह चार महाद्वादशी तिथि घटित तथा जया, विजया, जयन्ती एवं पापनाशिनी यह चार नक्षत्र घटित महाद्वादशियाँ हैं।

यदि सम्पूर्ण एकादशी अपना भोग काल 60 घड़ी से भी बढ़कर द्वादशी के प्रातः काल छूने लगती है तो उसे उन्मीलनी कहा जाता है। एवं यदि एकादशी 60 घड़ी सम्पूर्ण हो किन्तु द्वादशी तिथि 60 घड़ी से अधिक बढ़कर त्रयोदशी को भोगना चाहती हो तो उसे व्यंजुली महाद्वादशी कहा जाता है। यदि कभी एक ही दिन में प्रातः काल में हो एकादशी, सारा दिन हो द्वादशी तथा रात्रि शेष में हो त्रयोदशी, तो उसे त्रिपुष्पा महाद्वादशी कहा जाता है। एकादशी तिथि पूरी हो किन्तु यदि अमावस्या अथवा पूर्णिमा अपना भोगकाल 60 घड़ी से ज्यादा बढ़ जाए तब एकादशी का व्रत द्वादशी में ही होगा और उसका नाम पक्षवर्धिनी होगा।

शुक्ल पक्ष की द्वादशी को यदि पुनर्वसु, श्रवण, रोहिणी एवं पुष्य नक्षत्र के योग हो तो व्रत द्वादशी में होगा। पुनर्वसु नक्षत्र के योग से जया, श्रवण नक्षत्र के योग से विजया, रोहिणी नक्षत्र के योग से जयन्ती तथा पुष्य नक्षत्र के योग से पापनाशिनी महाद्वादशी होंगी।

Ekadashi एकादशी
Putrada Ekadasi
पुत्रदा एकादशी
Sat Tila Ekadasi
षटतिला एकादशी
Vijaya Ekadasi
विजया एकादशी
Amalaki Ekadasi
आमलकी एकादशी
Papamocani Ekadasi
पापमोचिनी एकादशी
Kamada Ekadasi
कामदा एकादशी
Varuthini Ekadasi
वरुथिनी एकादशी
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मोहिनी एकादशी
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निर्जला एकादशी
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Saphala Ekadasi
सफला एकादशी
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भैमी एकादशी
Utpanna Ekadasi
उत्पन्ना एकादशी